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    सत्य पुस्तक- विशाल ज्ञान-विज्ञान

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  • RENEW HUMAN           RENEW INDIA                RENEW WORLD

     भारत सरकार के साथ लेकिन सरकार की सोच से हमेशा आगे

    आध्यात्मिक एवं दार्शनिक विरासत के आधार पर एक भारत-श्रेष्ठ भारत निर्माण,

    पूर्ण मानव निर्माण व भारत को जगत गुरू बनाने की योजना है - पुनर्निर्माण


    नया, पुराना और वर्तमान

    जिस प्रकार वाहन-कार का आविष्कार हुआ। फिर उसका नवीन संस्करण आया, पुनः फिर उसका नवीन संस्करण आया। इस प्रकार नवीनीकृत किया जा रहा है परन्तु हैं सभी कार। इसी प्रकार सत्य का आविष्कार हुआ। फिर उसका नवीन संस्करण आया पुनः फिर उसका नवीन संस्करण आया। इस प्रकार नवीनीकृत किया जा रहा है। परन्तु हैं सभी सत्य। जिस प्रकार वाहन ”कार“ वर्तमान है उसी प्रकार सत्य भी वर्तमान है सिर्फ उसके व्यवहार में लाने के लिए संस्करण नवीन हो रहे है। नवीन संस्करण की पहचान तभी हो सकती है जब पुराने संस्करण की पहचान हो और उसका ज्ञान हो। अन्यथा वह सब पुराना ही लगेगा या नया ही लगेगा। नवीन संस्करण अधिक व्यावहारिक होता है। इसलिए वह अधिक क्रिया-प्रतिक्रियापूर्ण होता है और यदि क्रिया-प्रतिक्रिया पूर्ण नहीं है तो उसके दो कारण होगें। पहला नवीनत्व के पहचानने का अभाव या दूसरा वह संस्करण नवीन ही नहीं है ”कार“ हो या ”सत्य“ उसका नवीन संस्करण तब तक आता रहेगा जब तक कि वह पूर्ण विकसित और व्यावहारिक रूप को प्राप्त नहीं कर लेता। और सिर्फ वही संस्करण स्थिरता और व्यवहार में रहेगा जो पूर्ण व्यावहारिक और विकसित होगा। शेष विकास के क्रम के इतिहास के रूप में जाने जायेंगे। ऐसा ही होता हैं।

    - श्री लव कुश सिंह विश्वमानव

    रचनाकर्ता - लक्ष्य पुनर्निर्माण व उसकी प्राप्ति के लिए पाठ्यक्रम व कार्य योजना

    आविष्कारकर्ता - मन (मानव संसाधन) का विश्व मानक एवं पूर्ण मानव निर्माण की तकनीकी

    दावेदार - भारत सरकार का सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न


     

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  • विशाल ज्ञान-विज्ञान सबका समाधान

     

     

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    शास्त्राकार

    डाॅ0 रमेश कुमार

    कुमार क्लिीनिक, गली न0-6, सर्किट हाउस रोड

    न्यू शारदा नगर, सहारनपुर (उ0प्र0) भारत, पिन-247001

    e_mail : suryoudey@gmail.com

    Mobile No. 7037149981

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  • हमारा सम्मान - हमारे घर के राष्ट्रीय ध्वज


    हम अगर अपने घर-देश के राष्ट्रीय ध्वज का सम्मान सच्चाई से करना चाहते है, तो सबसे पहले सारे सरकारी प्राणी और नेताओं का जो कि हमारे शरीर के सारे अंगो के समान है, उनकेा कर्मठ बनाना और उनका सफाई-सुधार रखना ही पडे़गा। गैर सरकारी प्राणी तो राजा भी है और उसकी गलती की सजा, हमारे सरकारी प्राणी निश्चित करते है, देते है। वैसे हर एक की गलती की सजा इतनी प्रिय करनी है कि गलती करने वाला खुद सजा कबूल करके, साफ-सुथरा बनें, खुद के और सबके लायक बनें, कर्मठता बढ़ायें क्योंकि सब हमारे सम्बन्धी हैं। आप सबका ही कहना सही है राष्ट्रीय ध्वज के आगे, पाक-साफ व कर्मठ इन्सान ही सैल्यूट करें।

    जब ज्ञान बढे़गा तब अक्षर ज्ञान का फायदा होगा।

    सबको जीते जी स्र्वग देने के लिये, सबसे पहले सुधार कर्म करें या करेगें!

  • क्लिक करें=>संसार के पूजनीय भगवान, बुजूर्ग व देवी देवता गण
  • संसार के पूजनीय भगवान, बुजूर्ग व देवी देवता गण

    हमारे जिन्दा और जो हमे छोड़ गये हैं, वह बुर्जुग ही हमारे भगवान हैं। भगवान का कोई रुप नहीं होता, मतलब वह हरेक के रुप में है। क्योकि सब बुजुर्गाे को हमने देखा ही नहीं है, हर जीव का भगवान सबके लिये भगवान ही है। हर बड़ा चाहता है, मेरा छोटा, मेरी हर जिम्मेदारी सम्भालें। यह जिम्मेदारी हर पालने वाले को उसके भगवान (बुजुर्ग) विरासत मे देकर गये हैं। भगवान इतना छोटा है कि वह हर जर्रे में हैं, और इतना बडा है कि उससे बड़ा कुछ नहीं, कोई नहीं, आप देखने की कोशिश करें, कोशिश करते रहने वाले ही कामयाब होते हैं। सबसे आसान है, अपने छोटे व छोटी को भगवान व देवी बनायें और उनका इस्तेमाल करें। सच्चाई में पूजा-इबादत करने का हक उसे ही है, और पूजा-इबादत का अच्छा फल उसे ही मिलता है, खुद की व सबकी सफाई-सुधार करता रहता है।ं 
    हर अनियमितता की आग हर घर (देश) में तेजी से फैल रही है, बढ़़ रही है। दूसरा पड़ोसी या देशवासी भी हमारें कुछ हैं, सब अपने हैं, वह हमे याद करें या ना करें, हमे पता लगते ही सफाई-सुधार में तन, मन व धन से सहयोग करें, क्योंकि अपने को व अपने घर को पोल्यूशन से बचाने के लिये दूर तक सफाई-सुधार रखना ही समझदारी है। और पूरा संसार हमारा है, साबित करना है। 

    राम-राम जितना कहो, कुछ भी राम न होये।

    राम जैसा जो भी करें, जय जय राम की होये।ं

    पूजा-इबादत का शुभ फल लेने के लिये, पहले सफाई-सुधार जरुरी है।ं

  • क्लिक करें=>भूमिका - भाग-01
  • भूमिका

    कहा जाता है कि जब-जब अत्याचार या अनियमितताएं बढ़ी हैं, तब-तब कोई न कोई महापुरूष आया और उसने प्रजा या जनता को जागरूक किया या अत्याचार के खिलाफ खड़ा हुआ। संसार में हर देश में, हर प्रदेश में, हर धर्म में, हर जाति में, निश्चित महापुरूष आये, इतिहास गवाह है, राम, कृष्ण, इब्राहिम, ईशु, मरियम, जैसे अनेकों आये या पैदा हुऐ। रामायण, गीता, कुरान, बाइबिल, गुरूग्रन्थ साहब जैसे अनगिनत धर्म ग्रन्थ सदीयों से समाज को लगातार जागृत करते आ रहे हैं। भारत में, तुलसीदासजी ने जब देखा कि हिन्दू समाज बिखरने लगा है, हिन्दू जाति मौत के कगार पर है, तब तुलसीदासजी ने बाल्मिकीकृत रामायण को वीर रस में ढाल कर, समाज को सौंपा और समाज ने हर साल, रामलीला जैसे प्रोग्राम बना कर सारे संसार को लगातार जागृत करती आ रही है। इस ग्रन्थ को पढकर प्रेम, जोश, सहनशीलता, राजनीति ही नहीं, घर-संसार चलाना, सेवा भाव, दुश्मन को सही रूप में धराशायी करने जैसा सारा ज्ञान निश्चित मिलता है। ‘‘विशाल ज्ञान विज्ञान सबका समाधान’’ पुस्तक की रचना भी शायद ऐसी ही सफल कोशिश है।
    पूरे संसार में हर जगह महापुरुष, पण्डित, मौलवी, ग्रन्थी, पादरी, साधु-सन्यासी और हर धर्म ग्रन्थ होने के बाद भी, यही नहीं, हर इंसान पढ़ा लिखा होने के बाद भी ‘‘जिसकी लाठी उसकी भैंस’’ जैसा नियम बरकरार हैं। इस समय, गैर सरकारी प्राण, सरकारी प्राण और नेता के अधूरे ज्ञान के कारण, हर अनियमितता में, बेहद तेजी आई हैं और हर इंसान बेहद परेशान हैं या अपनी शर्म खो चुका हैं।
    सब गैर सरकारी प्राण, सारे सरकारी प्राण, सारे नेतागण या 5 साल के कार्यकाल वाले, खासतौर से सबका भविष्य विद्यार्थीगण में, जागृति लाने व सबको सही हक देने और हक लेने की कोशिश, ये पवित्र पुस्तक हैं। खास-तौर से सहीं ज्ञान कराना ही हमारा ध्येय हैं, कोई लिखी हुई पंक्ति, जब समाज सीखता हैं और लगातार उस पर अमल करता हैं या उससे फायदा उठाता हैं, ऐसी पुस्तक, धर्म ग्रन्थ बन जाती हैं। लम्बे समय तक गुजरे हुए समय को देखकर, इतिहास पढ़कर, लोगों केे व खुद के तजुर्बे, सब की मजबूरी और कमजोरी जानकर, बेहद गहराई से सोचकर कि इंसान कैसे बर्ताव करता हैं और इस बर्ताव के कारण उसका व सबका भविष्य कैसा होगा? उसमें सुधार-सफाई कैसे लाई जाये, जिससे उसका और सबका भविष्य संुनहरा हो, जैसे नशा करने वाला भी हर युक्ति से, नशा कर ही लेता हैं। नशा छूट जाए, नशा करने वाला खुद, खुश होकर नशा छोड़े, ऐसी युक्ति सोची व वर्णित की गयी हैं। नशा ही नहीं, हर गलत काम, गलती करने वाला खुद, हर गलती छोड़ने की सोचे, सब एक-दुसरे को समझायें और अपनाये, इस पवित्र पुस्तक में वर्णित हैं। खासतौर से हर समाज के, हर धर्मग्रंथ के अच्छे व सच्चे गुणों के सार को ध्यान में रखकर, किसी को तड़पाया न जाए, मारा न जाए, सही सुधार कैसे हो वर्णित हैं।
    हर जुर्म, चोरी, रिश्वत खोरी, भ्रष्टाचारी से लेकर उग्रवादीता तक बिना कोशिश किये, अपने आप, खुद में सिकुड़कर, खुद खत्म हो, ऐसी युक्ति इस पवित्र पुस्तक में वर्णित हैं। गलत और सही शब्द का र्निणय बेहद कठिन है, जिसे हम गलत कहते हैं, वह दुसरों के शब्दों में ही गलत होता हैं या हो सकता हैं। लेकिन सही या अच्छा वह है, जो सारे ब्रह्माण्ड में, हर जीव पर लागू हों और भविष्य में सबके लिये अच्छा फलदायी हों। ‘‘अन्त भला तो सब भला’’, सही ज्ञान होने पर यह आसानी से समझ में आ जायेगा। जिस प्रकार उलझी हुई गुत्थी का सही सिरा पकड़ में आ जाने के बाद, पूरी गुत्थी आसानी से सुलझ जाती हैं। बेहद गहराई से लंबे समय तक हर तरीके से नाप-तौल कर, परख और समझ कर बनायी गयी युक्ति, सूत्र या फार्मुला वर्णित किया गया है जिसको हर प्राणी अपनाने में व इस्तेाल करने में गर्व महसूस करेगा, पवित्र पुस्तक पढ़ने के पश्चात युक्ति अपनाने को खुद मजबूर होगा, व युक्ति अपनायेगा और अपना, अपनों का और सबका, यहँा तक कि हर जीव का जीवन सुखमय और बाधा रहित होगा।
    खासतौर से भारत मंे आजादी पाने के कुछ समय पहले से ही, छोटी सी अनियमितता भी रोकने और न बढ़ाने पर भी, आज इस समय किस प्रकार तेजी से क्यों बढ़ी है? उस कारण को खोज कर, हर अनियमितता खुद सिकुड़ कर खत्म हो, युक्ति वर्णित है। यह अनियमितता हर देश, हर प्रदेश, हर जगह, हर घर, हर परिवार, हर समाज, हर धर्म, हर विभाग में, हर प्राण में गहराई तक समा चुकी हैं। साक्षातकार करने के बाद एक भी प्राणी नहीं मिला, जिसे सुघार की कोई उम्मीद भी हो। सबका खुले रूप में कहना हैं, भ्रष्टता नीचे से ऊपर तक हैं, भ्रष्टता खत्म हो ही नहीं सकती। विडम्बना तो यह हैं कि हर धर्म, हर समाज, हर प्राण, हर विभाग सफाई-सुधार करना चाहते हैं, सोचते हैं, कोशिश करते हैं और पूरी तरह फेल हैं। यह सफाई-सुधार आसानी से हो और हमेशा, अपने आप होता रहे वर्णित हैं।
    इस पवित्र पुस्तक की रचना यह सोचकर की गई हैं कि संसार में, हर जगह का हर प्राणी, देवी-देवता, पीर-पैगम्बर हैं, समझदार है और सफाई-सुधार के लिए प्रयत्नशील है। यह पवित्र पुस्तक सबूत हैं, कि हर प्राण जो अच्छे हैं, धर्म और नियम में चलने वालों के साथ हैं या धर्म या नियम में चलने वालों की सहायता कर रहें हैं, हम हमेशा उनके साथ हैं।
    अनजान लोग कहते है कि ‘‘अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता’’ सही नहीं है, प्रत्यक्ष हैं, इतिहास गवाह है, धर्म-ग्रंथ गवाह हैं कि हमेशा एक ही प्राणी, कोई देवी-देवता, पीर-पैगम्बर या किसी महापुरूष (यह महापुरूष बाद में कहलायें) ने अकेले ही कदम उठाया हैं, वह पहले अकेला ही रहा है। यह भी सच हैं, कि बड़े काम के लिए बड़ा ही समय चाहिए, यहाँ पर यह भी कहना हैं कि भाड़ फोडना नहीं है, केवल सफाई- सुधार करना है। ऐसा धर्म, कर्म करने वाला, पहले अकेला ही होता हैं, आम आदमी ही होता हैं, बाद में वह महापुरूष कहलाया जाता हैं, या धर्म करते रहने पर, वह महापुरूष बनता चला जाता हंै। वह आप भी हो सकते हैं, बल्कि आप ही हैं। आज आप, एक मामूली चिंगारी हो सकते हैं, जो अपने अंदर भयंकर दावानल छुपाये बैठे है। केवल शुरूआत की, कोशिश भर करनी है। बाकी काम अपने आप होगा, यह पूर्ण विश्वास है और ऐसा होना निश्चित है।
    ‘‘घर का सुधार=गलती पर अविलम्ब सजा और मेहनती को प्रोत्साहन’’ नियम अपना कर, अमल में लाना है, फायदा उठाना है और अच्छे व कर्मठ को, खत्म न होने वाला फायदा देना है। गलती पर अविलम्ब सजा में, किसी का रिवर्सन, सस्पैन्शन, ट्रांसफर, जेल या सजा-ए- मौत नहीं हैं। केवल नगद जुर्माना हैं, जो अविलम्ब राजकोष में जमा कराना हैं। हमें राजकोष भी बढ़ाना हैं, जो समृद्धि की जड़ हैं, जो हर एक के लिये व अच्छांे के लिए सबसे बड़ी शक्ति हैं, जो हर व्याधा को रोकेगी और सबका भविष्य सुनहरा होगा।
    हर अनियमितता देखकर, सुधार करना है, या अविलम्ब शिकायत करनी हैं। शिकायत पत्र पर कम से कम, तीन प्राणा के वोटर नंबर सहित हस्ताक्षर कराने हैं। उसकी रिसिविंग अपने पास रखनी है, तीस दिन बाद रिमाइंडर देना है और उनके उच्च अधिकारी को लिखना है। बस रिजल्ट अपने आप आयेगा। वैसे हर जगह, हर विभाग में, सूचना विभाग भी हैं। आज आप, अकेले हो सकते हैं, दूसरी बार भी अकेले हो सकते हैं, आपके साथ कोई न हो, तीसरी बार ऐसा हो ही नहीं सकता। आपके साथ आपकी बीवी, बच्चा, भाई, दोस्त कोई तो, हो ही सकता हैं या आने वाले समय में आपके साथ अनेक होगंे और आप कामयाब होगंे। याद रहे, बड़े काम में बड़ा ही समय लगता है।
    इसके बावजूद हम तो आपके साथ हैं ही, आप केवल लेखक तक या इससे सम्बंधित प्राणी या यूनिटी तक 5/- रु. के लिफाफे या 5/- रु. के डाक टिकट के साथ शिकायत पहंुचायें, निश्चित समय में शिकायतकर्ता को सूचित किया जायेगा। आपकी शिकायत सुधार की हर कोशिश की जायेगी, सुधार निश्चित होगा। गलती करने वाला गलती मानेगा या आपकी मिनिमम दिहाड़ी देगा या अपनी पूरी दिहाड़ी, राजकोष में अविलम्ब जमा करायेगा, मतलब जुर्माना जमा करेगा। आपके सहयोग और साथ के तलबगार, सब हैं, हम भी हैं, सफाई-सुधार जल्द हो बेताब हैं और रहेंगे। आप भी, हम भी सफाई-सुधार के लिए सब कुछ करेंगे। सब काम से पहले सफाई-सुधार करंेगे, बाकी काम, सफाई-सुधार के बाद करेंगे। यह मेहनत संसार के, हर देश के, हर धर्म, हर समाज, हर प्राणी के लिए निश्चित है।

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  • क्लिक करें=>भूमिका - भाग-02
  • लेखक भारत का मूल निवासी हैं, जहां अनेक धर्म, अनेक जाति पल रही हैं, यह सब हमारे भाई-बच्चे, बडे़-छोटे या संबंधी जैसे हैं, तो पूरे संसार के प्राणा भी इसी रूप में कुछ न कुछ निश्चित हैं, भारत के प्राणी जागरूक हो, तो हर देश के प्राणी भी जागरूक होने ही चाहिए, समृद्ध होने ही चाहिए। हर धर्म में, हर विभाग में खास नियम हैं, सब अपने हैं, अपनों के काम आओं। निश्चित ही, भारत के प्राणी जागरूक हांे, तो हर देश के प्राणी भी जागरूक होने ही चाहिए, समृद्ध होने ही चाहिए, सबका सफाई-सुधार रखों। ये पवित्र पुस्तक ‘‘विशाल ज्ञान विज्ञान सबका समाधान’’ आप सब के सहयोग से, आप सब के लिए, आपके पास और हर जगह पहंुँचेगी और सच्चाई, कर्मठता, वफादारी बढ़ेगी, ज्ञान बढ़ने पर हर अनियमितता खुद खत्म होंगी और सारा संसार सुनहरा होगा।
    कड़वी सच्चाई हैं कि संसार का, हर प्राणी या हर जीव, इतने अपनो के होते हुए किसी भी हालत में अत्याचारों से कभी नहीं बचा, अपनों में, सारे सगे-सम्बंधी, सारे सरकारी प्राणी, सारे नेतागण, सारे गैर सरकारी प्राणी व सबका भविष्य विद्यार्थीगण तक शामिल हैं और सेन्ट-परसेन्ट, हर अत्याचार के या हर अनियमितता के जिम्मेदार, सारे सरकारी प्राणी और सारे नेतागण हैं, जो देखभाल करने की, हर माह मोटी पगार और हर फैसलेटी ही नहीं, कार्यकाल के बाद पेन्शन ही नहीं, मरने के बाद भी फेमली की नौकरी और फेमली पेन्शन तक लेते हैं, यह सब 58-60 साल या 5 साल के लिए वफादारी के लिये बुक हैं, वचनबद्ध हैं। विडम्बना यह भी हैं कि कानून होते हुए, यह मनुष्य बुद्धिजीवि होते हुए, यही नहीं पूरी तरह सक्षम होते हुए, अत्याचार करने और अत्याचार सहने के लिये मजबूर है। अकाट्य सच यह भी है कि अत्याचार या कोई अनीयमितता करने वाला सरकारी प्राणी हो, नेता हो या कोई और हो और चाहे जितने सक्षम हो, गलती करने वाला, उसके बच्चें, सगें-सम्बंघी भी, यहाँ तक कि उसका पूरा विभाग तक सजा से बच ही नहीं सकते, हर व्याधा, हर बीमारी इन्हें घेरती चली जाती हैं। यह गलती करने वाले भी, हमारे अपने कुछ न कुछ निश्चित हैं, हमें इन सबको बचाना है, इन्हें इनके लायक, समाज के लायक, उसके विभाग के लायक बनाना है। यह धर्म है, मानव धर्म है, सबसे बड़ा धर्म है। हर अत्याचार, हर अनियमितता खत्म करना, मानव धर्म सिखाना, सूत्र वर्णित है।
    विशेष: हमारे लिए सृष्टि के सारे जीव 84 लाख योनि के छोटे, बड़े सारे जीव, छोटे-बडे़ जरूर हैं लेकिन इज्जत सबकी बराबर है, सबकी इज्जत कम तो हो ही नहीं सकती, इज्जत सबकी बड़ी हैं, बल्कि निर्जीव तक की बेकदरी या अवहेलना की ही नहीं जा सकती, कम से कम ज्ञानी और समझदार इन्सान, किसी की बेइज्जती तो कर ही नहीं सकता। सच्चाई यह भी हैं कि गलती करने वाला या अनियमितता बढ़ाने वाला इन्सान, किसी का कुछ नहीं होता। जब तक की वो माँफी न माँगे या गलती की सजा न भुगते। इस सब के बावजूद लिखी हुई किसी कटु सच्चाई को अन्यथा बिल्कुल न ले। कोई शब्द जिससे किसी की इज्जत कम होती नजर आये, ऐसा बिल्कुल न समझे। हमारा ध्येय किसी की इज्जत कम करना है ही नहीं, सच्चाई लिखने का ध्येय यह है कि सफाई-सुधार जल्द और आसानी से हो, गलती करने वाले का जीवन साफ-सुथरा हो। जैसे कहा जाए सूरज में गर्मी है, यह उसकी इज्जत कम करना या बुराई करना नहीं। उसके बारे में बताना भर है। घर का मुखिया या प्रधान, राजा या राष्ट्रपति, जिसके सिर पर पगड़ी बंधी हो, उनके बारे में गलत लिखना, अपराध ही नहीं, भयंकर अपराध है लेकिन यह हमारी पगड़ी भी हैं, अगर हमारी पगड़ी, दागदार या गन्दी हों, तो सर्फ, सोडा, साबुन लगाकर, भट्टी पर चढ़ाकर, थपकी-डण्डे से पीट-पीट कर धोनी और साफ करनी ही चाहिए, फिर गर्म प्रेस से, हर सलवट निकालकर, चमका कर पहनना, पगड़ी व सबकी इज्जत बढ़ाना व बचाना हैं, यह अपराध हो ही नहीं सकता। यह समझदारी हैं। हर पाठक से प्रार्थना, इल्तजा या अपील है कि पढ़कर, किसी की इज्जत कम करने की या बुरा कहने की कोशिश भी न करें, वरना वह खुद जिम्मैंदार होगा। हमारी ऐसी किसी, अंजान गलती के लिए, हम क्षमा प्रार्थी हैं। लेकिन किसी की भी गलती का सुधार निश्चित करना हैं, यह कभी न भूलें। बिल्कुल ऐसी स्थिति पैदा करनी हैं, जैसे आपको कोई उंगली भी लगाये, तो आप बेहद बुरा मान जाते हैं, गुस्सा हो जाते हैं, मरने-मारने को तैयार हो जाते हैं। वहीं आप एक डाॅक्टर के द्वारा, खुद कड़वी दवा पीते हैं, इन्जेक्शन, आप खुद लगवाते हैं, यही नहीं आपके परिवार वालें, सम्बंधी तक, पहले पैसा जमा करते हैं और आप खुद कहते हैं आॅपरेशन करो। माँ-बाप, बीवी-बच्चे तक लिख कर दे देते हैं कि मर जाए तो कोई शिकायत नहीं। डाक्टर के कहने से खाना-पीना तक छोड़ देते हैं और उस डाॅक्टर का एहसान भी मानते हैं। इसी प्रकार आप भी कुछ ऐसी युक्ति सोचकर अमल कर सकते हैं मकसद सफाई-सुधार का ही होना चाहिए। आज खास-तौर से प्रशासन सम्बंधी सरकारी प्राणी पगार के अलावा, ऊपर के पैसे के लालच में अपने विभाग के अन्य र्कमचारी आदि को छोड़कर, केवल हर गैर सरकारी प्राणी को सुधारता हैं।
    नेता, नोट, वोट और सीट के लालच में कही भी सही सफाई-सुधार सोच ही नहीं पाता। गैर सरकारी प्राणी, पेट की आग, अथाह मेहनत, हर मजबूरी के कारण या डर के कारण सफाई-सुधार के लिए कोई कदम उठा ही नहीं पाता। सबका भविष्य विद्यार्थीगण, पढ़ाई की कठोर मेहनत, नौकरी की इच्छा और बड़ी-बड़ी महत्वकाक्षांओं के कारण, साथ ही बड़ों के अंकुश, सफाई-सुधार में हर अड़चन डालते हैं। अब इनमें गैर सरकारी प्राणी जरूर ऐसा है, जिसे हनुमान की तरह अपनी शक्ति का ज्ञान नहीं है। यह ज्ञान होते ही हर अनियमितता अपने आप खत्म होगी। वैसे भी दुष्ट चाहे जितना मजबूत हो, धर्मात्मा चाहे जितना कमजोर या मजबूर हो, जीत हमेशा सच्चाई की होती है। हिम्मत और दिमाग आपका होता है। हिम्मते मर्दे, मददे खुदा।
    आखिर में इस पवित्र पुस्तक को पढ़कर और अमल में लाकर इसकी पवित्रता को और बढ़ायेगें, साथ ही सारा संसार सुनहरा बनायेगे या सुनहरा बनाने में हमारा सहयोग करेंगे।


    मैं और तू से, हम बने, हम से, सब संसार,
    मैं या तू नहीं, तो हम नहीं, हम नहीं, नहीं संसार।
    करत-करत अभ्यास के, जड़मत, होत सुजान,
    रसरी, आवत-जात ते, पाथर पड़े निषान।

    -: गुलाम :-
    पहले गुलाम थे हम, अब जलील भी हो गये हैं,
    कभी गुलाम गैरों के थे, अब अपनो के हो गये हैं।
    करते थे अत्याचार जो, मालिक थे, वो हमारे,
    करते हैं अत्याचार अब, नौकर हैं, वो हमारे।
                                                                   (रोजी रोटी देने वाला मालिक होता है)
    सुभाष, लक्ष्मी, भगत सिंह, पले थे, कभी यहाँ पर,
    देशद्रोही, गद्दारों की खेती की जाती है, अब यहाँ पर।
    शेर एक होता है, राजा एक होता है, अरे कुछ कर ऐसा,
    मिटने लगे गद्दार, साबित हो, तू ही है, मर्द बच्चा।
                                 इति..........


    धन्यवाद,

    - लव कुश सिंह ”विश्वमानव“ 

    आविष्कारकर्ता-मन (मानव संसाधन) का विश्व मानक एवं पूर्ण मानव निर्माण की तकनीकी

    अगला दावेदार-भारत सरकार का सर्वोच्च नागरिक सम्मान -”भारत रत्न“

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  • विषय - सूची

    हमारा सम्मान

    भूमिका


    भाग-1

    विशाल ज्ञान-विज्ञान

    01.गुलाम

    02.सम्बन्धी

    03.महान

    04.सम्बन्धों को सच्चाई से निभाओ  

    05.सबका सार  

    01.सरकारी प्राणी  

    02.गैर सरकारी प्राणी

    03.जनता

    06.नेता और चुनाव

    07.हमारा देश

    08.घर और सच्चाई

    09.ब्रह्मास्त्र

    10.परमानन्द


    भाग-2

    भारत सरकार के विभाग व सफाई-सुधार

     

    01.नगर पालिका या महापालिका

    02.डी.एम.साहब

    03.डी.एस.ओ.व डी.एस.ओ.विभाग

    04.शिक्षा और शिक्षा विभाग

    05.विद्युत और विद्युत विभाग

    06.पुलिस और पुलिस विभाग

    07.डाक और डाक विभाग

    08.रेल और रेल विभाग

    09.परिवहन और परिवहन विभाग

    10.टैक्स और टैक्स विभाग

    11.आर.टी.ओ.व आर.टी.ओ.विभाग  

    12.अस्पताल और स्वास्थ्य विभाग

    13.एम्प्लायमेंट और इम्प्लायमेंट विभाग

    14.कृषि और कृषि विभाग

    15.सिंचाई और सिंचाई विभाग

    16.वन और वन विभाग

    17.पी.डब्ल्यू.डी.विभाग

    18.दूरभाष और दूरभाष विभाग

    19.अखबार और मीडिया  

    20.दूरदर्शन और दूरदर्शन विभाग

    21.न्याय और न्याय विभाग

    22.समाज कल्याण और विभाग

    23.खेल और क्रिकेट

    24.सजा और सुधार

    25.पूजा और इबादत

    26.शुरूआत

    27.भारत सरकार के विभाग के वेबसाइट

    भाग-3

    सबका समाधान

    (पुस्तक: ”विश्वशास्त्र-द नाॅलेज आॅफ फाइनल नाॅलेज“ से साभार)

    01. समाधान

    अ. समष्टि (संयुक्त) समाधान

    ब. व्यष्टि (व्यक्तिगत) समाधान

    02. आर्थिक स्वतन्त्रता की यात्रा

    01. गुलाम का अर्थ व दास प्रथा (पाश्चात्य)

    02.गुलाम प्रथा-दुनिया की हाट में बिकते हैं इंसान

    03.वैश्विक बौद्धिक विकास के साथ बदला गुलामी का स्वरूप

    04.पारिश्रमिक का इतिहास और वेतन (सैलरी) का अर्थ

    05.मजदूरी, वेतन, भत्ते और मानदेय, प्रोत्साहन, सौदागर, अभिकर्ता, विशेषाधिकार, दलाली का अर्थ

    06.रायल्टी-अर्थ और प्रकार

    07.ईश्वर, पुनर्जन्म और रायल्टी

    08.सफलता का पैमाना

    09.सफलता का नाम विशेषज्ञता (Specialization) नहीं, बल्कि ज्ञता (Generalization)है। 

    10.क्या आपको वस्तु खरीदने पर कम्पनी रायल्टी देती है जबकि कम्पनी आपके कारण हैं?

    03. पुनर्निर्माण - सत्य शिक्षा का राष्ट्रीय तीव्र मार्ग (RENEW - Real Education National Express Way)

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