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    परियोजना- छात्रवृत्ति

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  • RENEW HUMAN           RENEW INDIA                RENEW WORLD

     भारत सरकार के साथ लेकिन सरकार की सोच से हमेशा आगे

    आध्यात्मिक एवं दार्शनिक विरासत के आधार पर एक भारत-श्रेष्ठ भारत निर्माण,

    पूर्ण मानव निर्माण व भारत को जगत गुरू बनाने की योजना है - पुनर्निर्माण


    नया, पुराना और वर्तमान

    जिस प्रकार वाहन-कार का आविष्कार हुआ। फिर उसका नवीन संस्करण आया, पुनः फिर उसका नवीन संस्करण आया। इस प्रकार नवीनीकृत किया जा रहा है परन्तु हैं सभी कार। इसी प्रकार सत्य का आविष्कार हुआ। फिर उसका नवीन संस्करण आया पुनः फिर उसका नवीन संस्करण आया। इस प्रकार नवीनीकृत किया जा रहा है। परन्तु हैं सभी सत्य। जिस प्रकार वाहन ”कार“ वर्तमान है उसी प्रकार सत्य भी वर्तमान है सिर्फ उसके व्यवहार में लाने के लिए संस्करण नवीन हो रहे है। नवीन संस्करण की पहचान तभी हो सकती है जब पुराने संस्करण की पहचान हो और उसका ज्ञान हो। अन्यथा वह सब पुराना ही लगेगा या नया ही लगेगा। नवीन संस्करण अधिक व्यावहारिक होता है। इसलिए वह अधिक क्रिया-प्रतिक्रियापूर्ण होता है और यदि क्रिया-प्रतिक्रिया पूर्ण नहीं है तो उसके दो कारण होगें। पहला नवीनत्व के पहचानने का अभाव या दूसरा वह संस्करण नवीन ही नहीं है ”कार“ हो या ”सत्य“ उसका नवीन संस्करण तब तक आता रहेगा जब तक कि वह पूर्ण विकसित और व्यावहारिक रूप को प्राप्त नहीं कर लेता। और सिर्फ वही संस्करण स्थिरता और व्यवहार में रहेगा जो पूर्ण व्यावहारिक और विकसित होगा। शेष विकास के क्रम के इतिहास के रूप में जाने जायेंगे। ऐसा ही होता हैं।

    - श्री लव कुश सिंह विश्वमानव

    रचनाकर्ता - लक्ष्य पुनर्निर्माण व उसकी प्राप्ति के लिए पाठ्यक्रम व कार्य योजना

    आविष्कारकर्ता - मन (मानव संसाधन) का विश्व मानक एवं पूर्ण मानव निर्माण की तकनीकी

    दावेदार - भारत सरकार का सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न


     

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  • छात्रवृत्ति (स्कालरशिप), सहायता और लाभ देने का हमारा आधार

    राष्ट्र निर्माण का हमारा कार्य एक महान और ऐतिहासिक उद्देश्य के लिए व्यक्ति से लेकर विश्व के चहुमुखी विकास के लिए विकसित की गयी है जिसका सपना सत्य रूप में अपने देश भारत से प्रेम करने वाले देखते हो ेगें। हमारा कार्य नागरिकों को कैसे और किन क्षेत्रों में लाभ देता है इसके लिए निम्नलिखित का क्रमिक अध्ययन आवश्यक है-
    1. व्यापार का जन्म विचार से होता है। विचार पहले किसी एक व्यक्ति के अन्दर जन्म लेता है उसके उपरान्त भले ही वह कई व्यक्ति के समूह का बन जाये, अलग बात है। जब समूह का बन जाता है तब वह कम्पनी, कार्पोरेशन, एन.जी.ओ., ट्रस्ट और यदि अधिक शक्तिशाली हो तो राष्ट्र का व्यापार बन समाज के सामने आता है। इसके कुछ उदाहरण इस प्रकार हैं-
    - राजनीतिक क्षेत्र में एक ग्राम प्रधान/सभासद, क्षेत्र पंचायत सदस्य, क्षेत्र प्रमुख, जिला पंचायत सदस्य, जिला पंचायत अध्यक्ष, विधायक, सांसद, मंत्री इत्यादि बनने का विचार सर्वप्रथम उस व्यक्ति के मन में आता है। फिर वह बाहर व्यक्त होता है और उस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए वह धन, सम्बन्ध, जन आधार इत्यादि का प्रयोग करता है।
    - व्यापारिक क्षेत्र में व्यापार के वस्तु का विचार सर्वप्रथम व्यक्ति के अन्दर आता है फिर वह बाहर प्रोप्राइटरश्पि, पार्टनरशिप, प्राइवेट लिमिटेड कम्पनी, लिमिटेड कम्पनी इत्यादि के रूप में बाहर आता है और उस व्यापार के
    लक्ष्य की प्राप्ति के लिए वह सरकारी प्रक्रिया, कार्यालय, उत्पाद निर्माण, विज्ञापन, प्रचार-प्रसार, कर्मचारी वेतन, योजना, प्रलोभन इत्यादि पर धन खर्च करता है।
    - धार्मिक क्षेत्र में भी आजकल स्वयं के विचार के अनुसार स्वयं को लक्ष्य के अनुसार स्थापित करने के लिए व्यक्ति सरकारी प्रक्रिया, कार्यालय, उत्पाद निर्माण, विज्ञापन, प्रचार-प्रसार, कर्मचारी वेतन, योजना, प्रलोभन इत्यादि पर धन खर्च करता है।
    उपरोक्त कर्म करने के बाद भी बहुत से व्यक्ति अपना लक्ष्य नहीं प्राप्त कर पाते फिर भी वे कोशिश जारी रखते हैं। जिस प्रकार भारत सरकार हो या प्रदेश सरकार घाटे में भी चलने के बावजूद अपना व्यापार, सामाजिक-जन कल्याण का कार्य बन्द नहीं करती बल्कि कर्ज लेकर भी उसे चलाते रहती है।
    2. राष्ट्र निर्माण के इस व्यापार में भी उपरोक्त के अनुसार इसके आविष्कारक ने आविष्कार की स्थापना और अपने कार्य पर भारत सरकार के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ”भारत रत्न“ को प्राप्त (लक्ष्य) करने के लिए सरकारी प्रक्रिया,
    कार्यालय, उत्पाद निर्माण, विज्ञापन, प्रचार-प्रसार, कर्मचारी वेतन, योजना, प्रलोभन इत्यादि पर धन खर्च कर रहा है। जिसके निम्न स्रोत हैं-
    अ. आविष्कारक का स्वयं का धन।
    ब. आविष्कारक के शुभचिन्तकों द्वारा प्राप्त आर्थिक सहयोग।
    स. आविष्कार के स्थापनार्थ स्थापित प्राइवेट लिमिटेड कम्पनी में शामिल शेयरधारकों द्वारा निवेश किया गया धन।
    द. व्यापार के सशक्त प्रणाली के कारण अन्य स्थापित प्राइवेट लिमिटेड कम्पनी व मल्टीनेशनल कम्पनी से समझौता।
    द. व्यापार प्रारम्भ होने से प्राप्त धन व लाभ को व्यापार विकास में निवेश करने की प्रबल इच्छा।
    अर्थात हम अपने लक्ष्य को प्राप्त करने तक अपने व्यापार में शामिल लोगों के साख को सदैव निभाने में पूर्णतया सक्षम हैं।
    उदाहरण स्वरूप सभी शिक्षा संस्थान, शिक्षा देने के बदले एक शुल्क लेते हैं। उसमें से शिक्षकों का वेतन, अन्य खर्चों इत्यादि देने के बाद जो बचता है। वह उस शिक्षा संस्थान का लाभ होता है। छात्रवृत्ति, सरकार द्वारा प्रदान
    की जाती है। बहुत कम लेकिन ऐसे शिक्षा संस्थान भी हैं जो सभी छात्रों को शिक्षण शुल्क का शत-प्रतिशत छात्रवृत्ति प्रदान करते हैं। ये छात्रवृत्ति की राशि उन्हें सरकार, औद्यौगिक व व्यापारिक समूहों द्वारा शिक्षा के विकास के लिए प्राप्त होती है जो कहीं न कहीं से जनता के साथ किये गये व्यापार द्वारा ही उन्हें प्राप्त होता है। एक तरफ व्यापार, दूसरी तरफ समाज सेवा और लक्ष्य विकास और करने वाले की प्रसिद्धि यही एक पूर्ण व्यापार का कर्मज्ञान है। यदि यह आप समझ गये तो आपको व्यापार समझ में आ जायेगा।
    हमारे ”सत्य मानक शिक्षा“ प्रणाली में हम छात्रवृत्ति, बाद के छात्र से प्राप्त शुल्क में से लाभ को पहले के छात्रों में छात्रवृत्ति के रूप में वितरित करते रहते हैं। स्पष्ट है हम विद्यार्थी से जो शुल्क पाते हैं उसमें हमारा लाभ भी है। हम अपने खर्चो को सम्भालते हुए, शेष राशि को छात्रवृत्ति के रूप में प्रदान करते रहते हैं जिससे इस शिक्षा के प्रति रूचि बढ़े। शिक्षा संस्थान ऐसा नहीं करते लेकिन हम ऐसा कर रहे हैं। भारत में ऐसा कोई कानून नहीं कि उत्पाद का मूल्य सरकार निर्धारित करे। और ऐसी स्थिति में तो और भी मुश्किल है जब उत्पाद का आविष्कार किसी व्यक्ति का स्वयं का हो।
    पुनर्निर्माण, राष्ट्र निर्माण का व्यापार है इसे उसी प्रकार किया जा रहा है जिस प्रकार एक कम्पनी का प्रबन्ध और मार्केटिंग की जाती है। आम जनता से जुड़ा हुआ जब कोई व्यापार होता है तब कम्पनी एक निर्धारित धन विज्ञापन व प्रचार-प्रसार में खर्च करती है जो पम्फलेट, पोस्टर, बैनर, पत्रिका, समाचार-पत्र, प्रदर्शन, पुस्तिका इत्यादि के रूप में होती है। इस व्यापार के प्रचार-प्रसार में भी समय-समय पर इनका प्रयोग सदैव होता ही रहेगा। इन सब के साथ एक और विधि प्रयोग की जा रही है जिससे हमें प्रचार-प्रसार का लाभ प्राप्त होता है वह है नगद राशि (छात्रवृत्ति)। यह छात्रवृत्ति इस व्यापार के प्रचार-प्रसार के अन्तर्गत विज्ञापन खर्च का ही हिस्सा है। जिसकी राशि भी समूह व कम्पनी के अन्य परियोजनाओं के प्रचार-प्रसार व मार्केटिंग विकास के कारण व्यापारिक, ऋण, निवेश व अनुदान के रूप में प्राप्त होती है और उसका प्रयोग हम नगद राशि (छात्रवृत्ति) व सामाजिक सहायता के रूप में प्रदान करते रहते हैं।
    कोई अपने व्यापार से प्राप्त लाभ को अपने व अपने परिवार के लिए संचित करता है। यदि कोई अपने व्यापार से प्राप्त लाभ को सम्पूर्ण रूप से समाज पर ही खर्च कर दें तो उस पर भारत का कौन सा कानून काम करेगा? व्यापार से अलग साख का लाभ गोपनीय और बेहिसाब होता है। अगर उसे हमें समाज को देना है तो वह मनुष्य को ही दिया जाता है। इसलिए पता तो हो किसे दिया जाय, जिसके लिए पंजीकरण आवश्यक है।
    हमारे आय व धन आदान-प्रदान के विभिन्न परियोजनाएँ भी हैं।

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  • छात्रवृत्ति (Scholarship Help) और रायल्टी (Royalty) 

    1. वेबसाइट पर पंजीकृत सभी व्यक्ति/संस्था छात्रवृत्ति और सहायता के क्रम में आते हैं। छात्रवृत्ति और सहायता प्राप्त करने के लिए पाठ्यक्रम शुल्क का भुगतान अनिवार्य है।
    2. पंजीकरण के साथ ही आपका पाठ्यक्रम में प्रवेश हो जाता है और आपको अनुक्रमांक व पासवर्ड प्राप्त हो जाता है। साथ ही पाठ्यक्रम के व्यापार से प्राप्त होने वाले लाभ द्वारा छात्रवृत्ति और सहायता के लिए आप स्वतः ही साफ्टवेयर द्वारा स्वचलित छात्रवृत्ति और सहायता वितरण प्रणाली से जुड़ जाते हैं। पंजीकरण के उपरान्त यदि आप पाठ्यक्रम का पूर्ण शुल्क (तीनो किस्त) एक माह के अन्दर अपने डाक क्षेत्र प्रवेश केन्द्र (Postal Area Admission Centre - PAC) पर नहीं जमा करते हैं तो प्रतिदिन विलम्ब शुल्क रू0 25/-, मूल शुल्क में जुड़ने लगता है। बिलम्ब शुल्क के साथ शुल्क जमा करने के लिए हम आपकी प्रतीक्षा करते है जबकि हम आपको इस दौरान छात्रवृत्ति और सहायता देते रहते हैं जिसे आप अपने अनुक्रमांक व पासवर्ड से सदैव देख सकते हैं परन्तु आपके शुल्क जमा न करने के कारण वह आपको भुगतान नहीं हो पाता है।
    3. विद्यार्थी पाठ्यक्रम शुल्क जमा करने के तीन माह बाद आवश्यकता पड़ने पर शुल्क वापस ले सकते हैं और फिर जमा भी कर सकते है परन्तु उस समय तक आवश्यक है कि आप कम से कम दो नये विद्यार्थी का प्रवेश करा चुके हों। इस अवधि में आपकी छात्रवृत्ति और सहायता तो बनती है परन्तु वह भुगतान नहीं होता। भुगतान तभी होता है जब पाठ्यक्रम शुल्क और बिलम्ब शुल्क (इस स्थिति में रू0 100/- प्रतिदिन) आप जमा करते हैं।
    4. दूसरे पाठ्यक्रम में प्रवेश लेने से पूर्व में लिए गये पाठ्यक्रम में प्रवेश की छात्रवृत्ति और सहायता बन्द नहीं होती।
    5. छात्रवृत्ति और सहायता तभी बन्द होती है जब आप स्वयं डाक क्षेत्र प्रवेश केन्द्र (Postal Area Admission Centre - PAC) पर जाकर अपना पाठ्यक्रम शुल्क वापस लेते हैं और छात्रवृत्ति और सहायता प्रणाली से बाहर होने के लिए कहते हैं और उस समय तक आप कम से कम दो नये विद्यार्थी का प्रवेश करा चुके होते हैं।
    6. शत प्रतिशत छात्रवृत्ति और सहायता प्राप्त करने के लिए शिक्षार्थी की वेबसाइट पर 50 प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य है। 50 प्रतिशत से कम उपस्थिति होने पर छात्रवृत्ति की राशि से 10 प्रतिशत की कटौती निर्धारित है। शिक्षार्थी की उपस्थिति विज्ञापनों के बाद आने वाले प्रश्नों के उत्तर देने से हमें ज्ञात होता है। प्रतिदिन एक प्रश्न दोपहर के 12 बजे आपके लिए आते हैं जो अगले दिन दोपहर 12 बजे तक दूसरे प्रश्न के आने तक आपके लाॅगइन एरिया में रहता है। माह में कुल 30 प्रश्न आते हैं जिसमें से 15 प्रश्नों (वर्ष में 180 प्रश्न) के उत्तर देने पर आपकी उपस्थिति 100 प्रतिशत मानी जाती है और आप शत प्रतिशत छात्रवृत्ति और सहायता प्राप्त करने के अधिकारी होते हैं।
    7. कोई भी शिक्षार्थी किसी अन्य शिक्षार्थी का प्रवेश पंजीकरण वेबसाइट पर करा सकता है यह नया शिक्षार्थी जब भी अपना पाठ्यक्रम शुल्क जमा करता है तब प्रवेश कराने वाले पुराने शिक्षार्थी को शुल्क का 10 प्रतिशत का अतिरिक्त लाभ प्राप्त होता है और जब नया शिक्षार्थी छात्रवृत्ति रू0 5,000/- प्राप्त करता है तब प्रवेश कराने वाले पुराने शिक्षार्थी को छात्रवृत्ति रू0 5,000/- का 10 प्रतिशत का अतिरिक्त लाभ भी प्राप्त होता है। इस प्रकार ”पढ़ने और पढ़ाने“ के इस कार्य में ज्ञान के साथ आर्थिक लाभ का व्यापार भी है।
    8. पाठ्यक्रम के बदले में छात्रवृत्ति चुनने व पाठ्यक्रम शुल्क जमा करने पर एक वर्ष में न्यूनतम रू0 5,000/- दी जाती है।
    9. वर्ष में एक बार छात्रवृत्ति रू0 5,000/- प्राप्त करने के उपरान्त हमारे व्यापार के लाभांस/रायल्टी को सदैव प्राप्त करने के लिए जीवन में एक बार दो नये विद्यार्थीयों को पाठ्यक्रम के बारे में बताना व उनका प्रवेश कराना अनिवार्य है। जब तक आप दो नये विद्यार्थीयों को पाठ्यक्रम के बारे में बताना व उनका प्रवेश नहीं करा देते तब तक लाभांस/रायल्टी का भुगतान नहीं होता परन्तु लाभांस/रायल्टी बनती रहती है। जब आप हमारे विद्यार्थी रहते हैं तब आपको छात्रवृत्ति या चुनी गई सहायता प्राप्त होती है। जब हमारे लिए आप व्यापार करते हैं तब आप रायल्टी की योग्यता में आते हैं।
    10. लाभांस/रायल्टी की राशि रू0 5,000/- के गुणक में ही दी जाती है जिसकी अधिकतम सीमा प्रवेश लेने वाले विद्यार्थीयों की संख्या पर निर्भर करता है।

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